सरकार ने बदले रजिस्ट्री नियम, जानिए किन 5 दस्तावेज़ों की होगी जरूरत | Land Registry

Land Registry:साल 2026 में भारत में भूमि और संपत्ति के लेन-देन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियमों का मुख्य उद्देश्य संपत्ति सौदों में होने वाली धोखाधड़ी और जालसाजी को रोकना है। डिजिटल माध्यमों के उपयोग और आवश्यक दस्तावेजों की संख्या बढ़ाने से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया है। अब जो भी व्यक्ति जमीन या मकान खरीदना या बेचने की योजना बनाएगा, उसे कई महत्वपूर्ण कागजात जमा करना अनिवार्य होगा।

पहचान और निवास प्रमाणपत्र की आवश्यकता

नए नियमों के अनुसार, खरीदार और विक्रेता दोनों को अपनी पहचान प्रमाणित करने वाले दस्तावेज़ प्रस्तुत करना होंगे। आधार कार्ड को सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना गया है क्योंकि इसमें बायोमेट्रिक जानकारी शामिल होती है। इसके अतिरिक्त पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस में से किसी एक या अधिक दस्तावेज़ की आवश्यकता होगी। निवास प्रमाण के लिए बिजली, पानी या टेलीफोन बिल, रेशन कार्ड, बैंक खाता विवरण या किराए का अनुबंध पत्र जमा करना होगा। कुछ राज्यों में आधार से ई-केवाईसी भी अनिवार्य कर दी गई है, जिससे पहचान तुरंत सत्यापित हो जाती है।

संपत्ति का स्वामित्व और टाइटल जांच

संपत्ति रजिस्ट्री का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा टाइटल डीड की जांच है। टाइटल डीड में पिछले मालिकों और संपत्ति के हस्तांतरण का पूरा विवरण होता है। नए नियमों के अनुसार, कम से कम पिछले तीस वर्षों का स्वामित्व रिकॉर्ड जांचना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि संपत्ति पर किसी प्रकार का कानूनी विवाद या रोक न हो। टाइटल की पूरी जांच कर लेना खरीदार को भविष्य में होने वाली कानूनी समस्याओं से बचाता है।

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अनापत्ति प्रमाणपत्र और कर प्रमाणपत्र

नई प्रक्रिया में संपत्ति से संबंधित एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) लेना अनिवार्य है। यदि संपत्ति किसी सोसायटी या सहकारी समिति में है, तो संबंधित संस्था से लिखित अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही कर संबंधी प्रमाणपत्र जमा करना आवश्यक है, जिससे यह सुनिश्चित हो कि संपत्ति पर कोई बकाया कर या ऋण न हो। कृषि भूमि बेचने या गैर-कृषि उपयोग में बदलने के लिए राजस्व विभाग से अनुमति लेना भी जरूरी है।

डिजिटल प्रक्रिया और सुरक्षा

सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया है। अधिकांश राज्यों में ई-रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे दस्तावेज़ ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं। डिजिटल प्रणाली से समय की बचत होती है और भ्रष्टाचार कम होता है। भविष्य में ब्लॉकचेन जैसी तकनीक का उपयोग भी संपत्ति रिकॉर्ड को सुरक्षित और अपरिवर्तनीय बनाने के लिए किया जा सकता है।

नागरिकों के लिए सुझाव

संपत्ति खरीदने या बेचने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज़ तैयार रखें। टाइटल जांच, एनओसी और कर प्रमाणपत्र प्राप्त करना जरूरी है। अनुभवी वकील या संपत्ति सलाहकार की मदद लेने से भविष्य में कानूनी समस्याओं से बचा जा सकता है। हमेशा आधिकारिक सरकारी पोर्टल और रजिस्ट्री कार्यालय से ही जानकारी प्राप्त करें।

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डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। रजिस्ट्री नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। नवीनतम और सटीक जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक सरकारी स्रोत देखें।

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