Income Tax Bill New Rules:भारत में इनकम टैक्स सिस्टम को और अधिक सरल, पारदर्शी और विवाद-रहित बनाने के लिए सरकार ने इनकम टैक्स बिल 2025 लाया है। यह बिल 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसका उद्देश्य पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 के जटिल प्रावधानों को आधुनिक और आसान बनाना है। पुराने एक्ट में लगभग 1200 प्रावधान और 900 स्पष्टीकरण थे, जो आम टैक्सपेयर्स के लिए समझना मुश्किल और विवादास्पद साबित होते थे। नए बिल में इन्हें संक्षेप और सरल भाषा में लिखा गया है ताकि आम व्यक्ति आसानी से टैक्स फाइल कर सके।
नए बिल का उद्देश्य और आवश्यकता
पुराने इनकम टैक्स एक्ट में कई जटिल नियम थे, जिनके कारण टैक्सपेयर्स को अक्सर कानूनी विवादों का सामना करना पड़ता था। कोर्ट केस और असहमति की स्थिति भी बढ़ती थी। नया बिल इन समस्याओं को कम करने के लिए लाया गया है। इसमें डिजिटल असेसमेंट और पेपरलेस प्रोसेस पर जोर दिया गया है, जिससे टैक्स फाइलिंग तेज, आसान और सुविधाजनक हो जाएगी। नया कॉन्सेप्ट ‘टैक्स ईयर’ पेश किया गया है, जिसमें प्रिवियस ईयर और असेसमेंट ईयर को एकीकृत किया गया है। इससे टैक्स फाइलिंग और असेसमेंट दोनों प्रक्रिया सरल और विवाद रहित हो गई हैं।
टैक्स स्लैब में बदलाव और मध्यम वर्ग को राहत
नए इनकम टैक्स बिल में टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण राहतें दी गई हैं। नए बिल के तहत न्यू रिजीम में ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं देना होगा, जबकि पुराने नियम में यह सीमा ₹7 लाख थी। इसका लाभ खासतौर पर मध्यम वर्ग के लोगों को होगा, जो मुख्य रूप से सैलरी पर निर्भर हैं और जिनकी निवेश क्षमताएँ सीमित हैं।
पुराने रिजीम में 80C, 80D जैसी छूटें जारी रहेंगी, लेकिन न्यू रिजीम में ये छूट लागू नहीं होतीं। इसका मतलब है कि जिन लोगों के पास ज्यादा निवेश और डिडक्शन हैं, उनके लिए पुराने रिजीम को चुनना फायदेमंद रहेगा। वहीं, कम निवेश करने वाले और सैलरीड लोग न्यू रिजीम अपनाकर टैक्स में बचत कर सकते हैं।
डिजिटल और पेपरलेस प्रोसेस
नया इनकम टैक्स बिल टैक्सपेयर्स की सुविधा को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। डिजिटल प्रोसेस और पेपरलेस फाइलिंग के जरिए अब ITR फाइलिंग तेज और आसान हो जाएगी। टैक्सपेयर्स को फाइलिंग के लिए लंबी कतारों या जटिल फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा बिल में ‘ट्रस्ट फर्स्ट, वेरीफाई लेटर’ जैसे नए प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिसका अर्थ है कि टैक्सपेयर्स अपने डेटा की सटीकता और ईमानदारी के आधार पर टैक्स फाइल कर सकते हैं। इससे कानूनी विवाद कम होंगे और टैक्स का अनुपालन भी आसान होगा।
मुख्य बदलाव और लाभ
नए बिल में कई बदलाव मध्यम वर्ग और आम निवेशकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हैं। न्यू रिजीम में ₹12 लाख तक की आय पर जीरो टैक्स, ULIP प्रीमियम ₹2.5 लाख से ऊपर पर कैपिटल गेन टैक्स और हाउस प्रॉपर्टी में नोटिशनल रेंट पर 30% डिडक्शन जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इसके अलावा प्री-कंस्ट्रक्शन इंटरेस्ट सभी प्रॉपर्टी पर लागू होगा।
बिजनेस और कॉर्पोरेट टैक्स में भी राहत दी गई है। इंटर-कॉर्पोरेट डिविडेंड डिडक्शन बहाल किया गया है और ट्रांसफर प्राइसिंग को सरल बनाया गया है। लेट रिटर्न फाइलिंग पर रिफंड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, विशेषकर बीमारियों या आकस्मिक परिस्थितियों में। ये सभी बदलाव टैक्सपेयर्स को आसानी से राहत देने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
आम आदमी को लाभ कैसे होगा
सैलरी कमाने वाले लोग, जिनकी आय ₹10-15 लाख के बीच है, न्यू रिजीम को अपनाकर टैक्स में राहत पा सकते हैं। डिजिटल प्रोसेस और पेपरलेस फाइलिंग से समय की बचत होगी और टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया सरल हो जाएगी। इसके अलावा टैक्स स्लैब में बढ़ी हुई छूट और जीरो टैक्स सीमा मध्यम वर्ग के लिए वित्तीय रूप से राहत देने वाली है।
हालांकि, जिनके पास अधिक निवेश या टैक्स डिडक्शन हैं, वे पुराने रिजीम को ही अपनाएंगे। कुल मिलाकर नया इनकम टैक्स बिल मध्यम वर्ग और आम आदमी के लिए राहत देने वाला है। टैक्स बढ़ोतरी की संभावना इस बिल में नहीं दिखाई देती। यह बिल टैक्स सिस्टम को सरल, डिजिटल और विवाद-रहित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इनकम टैक्स बिल 2025 मध्यम वर्ग और आम आदमी के लिए काफी फायदेमंद है। यह बिल टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाता है, डिजिटल और पेपरलेस प्रोसेस पर जोर देता है और विवादों को कम करता है। न्यू रिजीम में बढ़ी हुई छूट और ₹12 लाख तक की आय पर जीरो टैक्स मध्यम वर्ग के लिए राहत प्रदान करती है। डिजिटल असेसमेंट और ट्रस्ट-आधारित फाइलिंग से समय और प्रयास की बचत होगी। कुल मिलाकर यह नया बिल टैक्स सिस्टम को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। व्यक्तिगत वित्तीय निर्णय लेने से पहले कृपया आधिकारिक सरकारी स्रोत और योग्य वित्तीय सलाहकार से पुष्टि करें। नए इनकम टैक्स बिल की नियमावली समय-समय पर अपडेट हो सकती है।