Digital Land Registry New Rules : डिजिटल जमीन रजिस्ट्री अब जरूरी! सिर्फ ₹100 में होगी रजिस्ट्री, जानें पूरी प्रक्रिया

भारतीय समाज में पुश्तैनी या पैतृक संपत्ति का विशेष महत्व है। यह वह संपत्ति होती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार में हस्तांतरित होती रहती है। कई बार परिवार के सदस्यों को अपनी पुश्तैनी संपत्ति में हिस्सा नहीं मिल पाता या उनके अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में अपने हक को सुरक्षित करने के लिए सही कानूनी प्रक्रिया का पालन करना बेहद जरूरी है।

पुश्तैनी संपत्ति क्या होती है

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, पुश्तैनी संपत्ति वह होती है जो पिता, दादा, परदादा और परपरदादा से मिली हो और चार पीढ़ियों से परिवार में चली आ रही हो। इस संपत्ति में बेटे और बेटियों दोनों को समान अधिकार प्राप्त हैं। 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को भी जन्म से ही समान हक मिल गया है। मुस्लिम, ईसाई और पारसी कानून में भी संपत्ति के उत्तराधिकार के अपने नियम हैं, जिसमें बच्चों को अधिकार प्राप्त होता है।

पुश्तैनी संपत्ति में हक न मिलने के कारण

कई बार परिवार में जानबूझकर कुछ सदस्यों को उनके हिस्से से वंचित किया जाता है। इसके अलावा गलत दस्तावेज़ीकरण, संयुक्त परिवार में विभाजन न होना, जबरदस्ती या धोखाधड़ी, और कानूनी जानकारी का अभाव भी कारण बन सकते हैं। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया अपनाना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

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कानूनी दावा करने की प्रक्रिया

सबसे पहले संपत्ति से जुड़ी पूरी जानकारी एकत्र करनी चाहिए। इसमें संपत्ति का स्थान, क्षेत्रफल और वर्तमान मालिक का नाम शामिल होता है। इसके बाद किसी अनुभवी संपत्ति वकील से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। वकील के माध्यम से परिवार के अन्य सदस्यों को नोटिस भेजा जाता है और संभव हो तो पारिवारिक मध्यस्थता की जाती है। यदि मामला सुलझ नहींता है, तो सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करना पड़ता है। कोर्ट में सभी दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने के बाद निर्णय लिया जाता है और उसे क्रियान्वित किया जाता है।

आवश्यक दस्तावेज

दावा करने के लिए पहचान और संबंध प्रमाण, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जैसे खसरा-खतौनी, म्युटेशन रिकॉर्ड, बिक्री या उपहार पत्र, संपत्ति कर रसीदें, नक्शा और सर्वे रिपोर्ट, कानूनी दस्तावेज जैसे वसीयत, पावर ऑफ अटॉर्नी और हलफनामा जरूरी होते हैं। इसके अलावा उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और नोटिस की प्रतियां भी आवश्यक हैं।

विशेष प्रावधान और सावधानियां

बेटियों, दत्तक बच्चों और विधवा/पत्नी के अधिकार कानून में सुरक्षित हैं। समय पर कार्रवाई करना, दस्तावेज सुरक्षित रखना, विश्वसनीय वकील चुनना और पारिवारिक समाधान का प्रयास करना सलाहकार कदम हैं। धोखाधड़ी से बचना और संपत्ति रिकॉर्ड की नियमित जांच भी जरूरी है।

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पुश्तैनी संपत्ति में हक प्राप्त करना आपका कानूनी अधिकार है। सही प्रक्रिया अपनाकर और जरूरी दस्तावेज तैयार करके अनुभवी वकील की मदद से आप अपना हक पा सकते हैं। कानून आपके साथ है और न्याय पाने में देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना और कानूनी मार्ग अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पुश्तैनी संपत्ति से संबंधित सटीक जानकारी और अद्यतन नियमों के लिए संबंधित सरकारी या कानूनी स्रोत से परामर्श अवश्य लें।

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