Cooking Oil Price Update:देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच खाने के तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। बीते कुछ महीनों से सरसों तेल और रिफाइंड तेल के दाम इतने बढ़ गए थे कि रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका था। अब सरकार द्वारा लिए गए अहम फैसलों का असर बाजार में साफ दिखाई देने लगा है और तेल की कीमतों में नरमी आई है।
सरकार के फैसले का बाजार पर असर
महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार ने जरूरी वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स, खासकर जीएसटी दरों में कटौती की है। इस फैसले का उद्देश्य साफ है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें आम लोगों की पहुंच में बनी रहें। जब टैक्स का बोझ कम होता है तो कंपनियों और व्यापारियों की लागत भी घटती है। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है और बाजार में कीमतें नीचे आती हैं। खाने के तेल के मामले में भी यही देखने को मिल रहा है।
सरसों तेल की कीमतों में गिरावट
सरसों तेल भारतीय रसोई का एक अहम हिस्सा है, खासकर उत्तर भारत और ग्रामीण क्षेत्रों में। हाल के समय में इसके दाम काफी बढ़ गए थे, जिससे आम परिवारों को भारी परेशानी हो रही थी। अब बाजार में सरसों तेल के भाव में गिरावट आई है और यह लगभग 15,600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह गिरावट घरेलू बजट के लिए काफी राहत भरी है क्योंकि सरसों तेल रोजमर्रा के खाने में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
रिफाइंड तेल भी हुआ सस्ता
शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला रिफाइंड तेल भी अब पहले की तुलना में सस्ता हो गया है। कुछ समय पहले तक रिफाइंड तेल 165 रुपये प्रति किलो या उससे ज्यादा के स्तर पर पहुंच गया था। अब इसकी कीमत घटकर करीब 150 रुपये प्रति किलो के आसपास आ गई है। इसका फायदा न सिर्फ घरों को बल्कि होटल, ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट कारोबारियों को भी मिला है, जिनका खर्च कुछ हद तक कम हुआ है।
घरेलू बजट पर सकारात्मक प्रभाव
खाने के तेल की कीमतें कम होने से सबसे बड़ा असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ता है। मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों के लिए यह राहत बेहद अहम है। जब रसोई का खर्च कम होता है तो उसी पैसे को बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों या दूसरी जरूरी जरूरतों पर खर्च किया जा सकता है। महंगाई के दौर में इस तरह की राहत आम लोगों के लिए काफी मायने रखती है।
आगे कीमतों को लेकर क्या अनुमान है
हालांकि फिलहाल तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति हमेशा बनी रहेगी, ऐसा कहना मुश्किल है। आने वाले महीनों में त्योहारों और शादी-विवाह का सीजन शुरू होगा, जिससे खाने के तेल की मांग बढ़ सकती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार के हालात, आयात लागत और कच्चे तेल के दाम भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में भविष्य में दाम फिर बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सही रणनीति
मौजूदा हालात में उपभोक्ताओं के लिए सबसे बेहतर यही है कि वे जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें और बाजार के भाव पर नजर बनाए रखें। जिनके पास भंडारण की सुविधा है, वे सीमित मात्रा में अतिरिक्त तेल खरीदकर भविष्य की संभावित महंगाई से खुद को सुरक्षित कर सकते हैं। अलग-अलग दुकानों पर कीमतों की तुलना करना भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर सरसों तेल और रिफाइंड तेल की कीमतों में आई गिरावट आम जनता के लिए राहत की खबर है। सरकार द्वारा जीएसटी में की गई कटौती का असर अब साफ तौर पर बाजार में दिखने लगा है। भले ही यह राहत स्थायी न हो, लेकिन फिलहाल लोग इस मौके का फायदा उठाकर अपने घरेलू बजट को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। खाने के तेल की कीमतें राज्य, शहर, बाजार, मांग और आपूर्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। सटीक और ताजा जानकारी के लिए अपने स्थानीय बाजार या आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करना जरूरी है। लेखक किसी भी प्रकार के मूल्य परिवर्तन या वित्तीय निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं है।