Train ticket Booking:2026 की शुरुआत में भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए कई बड़े बदलाव लागू किए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल टिकट बुकिंग प्रक्रिया में। इसका मुख्य उद्देश्य है वेटिंग टिकट की स्थिति का पहले ही अनुमान लगाना और असली यात्रियों को सुविधा प्रदान करना। अब स्लीपर और एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कुछ कड़े नियम भी लागू कर दिए गए हैं। यह कदम फर्जी बुकिंग और दलालों की गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है।
AI के जरिए वेटिंग टिकट की जानकारी
रेलवे की नई बुकिंग प्रणाली में AI तकनीक को शामिल किया गया है। AI पुराने डेटा और टिकट कैंसिलेशन पैटर्न का विश्लेषण करके यह अनुमान लगाएगा कि किसी यात्री की वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं। इससे यात्रियों को पहले ही जानकारी मिल जाएगी और वे अपनी यात्रा की योजना आसानी से बना सकेंगे। यह फीचर विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
स्लीपर और एसी कोच में नए नियम
स्लीपर और एसी कोच में अब केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्री ही यात्रा कर सकेंगे। वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को रिजर्व्ड कोच में बैठने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई यात्री वेटिंग टिकट लेकर स्लीपर कोच में पाया जाता है, तो उसे अगले स्टेशन पर उतार दिया जाएगा और ₹250 का जुर्माना लगेगा। वहीं, एसी कोच में यह जुर्माना ₹440 तक हो सकता है। यह नियम यात्रियों की सुरक्षा और कन्फर्म टिकट धारकों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है।
आधार आधारित बुकिंग प्रणाली
फर्जी बुकिंग को रोकने के लिए अब आधार लिंकिंग अनिवार्य कर दी गई है। IRCTC की वेबसाइट पर टिकट बुक करने के लिए आधार वेरिफिकेशन जरूरी होगा। यह प्रणाली तीन चरणों में लागू की गई है। पहले चरण में सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक केवल आधार लिंक वाले यूजर्स ही बुकिंग कर पाएंगे। दूसरे चरण में एडवांस बुकिंग के पहले दिन पूरी तरह आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। तीसरे चरण में ओटीपी वेरिफिकेशन को और सुरक्षित बनाया गया है। इस व्यवस्था से ऑटो बुकिंग और दलालों की गतिविधियों पर रोक लगेगी।
चार्ट बनने के समय में बदलाव
अब ट्रेन का पहला रिजर्वेशन चार्ट पहले की तुलना में जल्दी तैयार किया जाएगा। पहले चार्ट छूटने का समय तय था, लेकिन नए नियम के अनुसार यह चार्ट यात्रा से लगभग 10 घंटे पहले बन जाएगा। इसका लाभ यह है कि वेटिंग टिकट वाले यात्री समय रहते जान सकेंगे कि उनका टिकट कन्फर्म हुआ है या नहीं। अगर टिकट कन्फर्म नहीं होता है, तो वे अपनी यात्रा रद्द कर सकते हैं या वैकल्पिक योजना बना सकते हैं।
वेटिंग लिस्ट की सीमा तय
लंबी दूरी की ट्रेनों में अब वेटिंग लिस्ट केवल कुल सीटों का 25% तक ही जारी होगी। इससे यात्रियों को भ्रम नहीं होगा और सिस्टम पर दबाव भी कम रहेगा। वेटिंग लिस्ट पूरी होने के बाद आगे की बुकिंग स्वतः बंद कर दी जाएगी।
डिजिटल आधुनिकीकरण और भविष्य की योजना
भारतीय रेलवे अब पूरी तरह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में बढ़ रहा है। AI तकनीक न केवल टिकट बुकिंग में बल्कि ट्रेन के मेंटेनेंस और सफाई जैसी व्यवस्थाओं पर भी निगरानी रखने में मदद कर रही है। फर्जी अकाउंट्स को बंद किया जा रहा है, ताकि असली यात्रियों को आसानी से सीट मिल सके। भविष्य में वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत जैसी नई ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी, जिससे वेटिंग टिकट की समस्या कम होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
कुल मिलाकर, भारतीय रेलवे के नए AI आधारित टिकट नियम यात्रियों के लिए राहत और सुविधा दोनों प्रदान करेंगे। वेटिंग टिकट का अनुमान पहले ही लगाना, आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य करना और स्लीपर तथा एसी कोच में सख्त नियम लागू करना यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएगा। डिजिटल तकनीक के इस इस्तेमाल से न केवल टिकट बुकिंग पारदर्शी होगी बल्कि फर्जी बुकिंग और दलाल गतिविधियों पर भी रोक लगेगी।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है और रेलवे के हालिया अपडेट पर आधारित है। AI तकनीक का इस्तेमाल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए किया जा रहा है, इसका मतलब यह नहीं है कि AI खुद टिकट बुक कर देगा। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन 139 से नियमों और बदलावों की पुष्टि कर लें।